आपदा विभाग में हुए घोटालों को लेकर बड़ा अपडेट,जांच समितियों की रिपोर्ट पर टिकी नजर
देहरादून। भाजपा नेता रविन्द्र जुगरान के द्वारा आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र (DMMC) में हुये करोड़ों रुपय के घोटालों के विषय में की गयी कई दर्जनों शिकायतों के परिणामस्वरूप आपदा प्रबंधन विभाग ने विवश होकर घोटालों की जांच के लिये अलग अलग जांच समितियां गठित की और अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की हैं.
यह संज्ञान में आया है कि डिप्टी सेक्रेटरी रईश अहमद की अध्यक्षता में 02 वर्ष पहले गठित की गयी जांच समिति ने तो अभी तक शासन को अपनी जांच रिपोर्ट ही नहीं दी है। यह भी संज्ञान में आया है कि संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो.ओबेदुल्लाह अंसारी की अध्यक्षता में गठित जांच समिति ने वित्त विभाग से परामर्श लिये बिना और मंत्रिमंडल के आदेश दिनांक 11 मई 2018 के शासनादेश को छुपाकर एक फर्जी जांच रिपोर्ट शासन को प्रस्तुत की गई है, इसी फर्जी जांच रिपोर्ट के आधार पर तीन नियमित कार्मिकों को वर्तमान में गलत और दोगुना वेतन निर्गत किया जा रहा है। अपर सचिव जितेंद्र सोनकर के द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर DMMC में हुये कुछ गबन और घोटालों के मामलों को स्वीकार करते हुये आपदा प्रबंधन विभाग ने अनुमानित 10.59 करोड़ के हुये घोटालों को दिनांक 24 जनवरी 2024 को मुख्य सचिव एस०एस०संधू के सामने शासी निकाय की बैठक में प्रस्तुत किया था।
लेकिन आश्चर्य की बात है कि शासी निकाय और मुख्य सचिव के द्वारा 10.59 करोड़ के इन गबन और घोटालों के प्रकरणों पर तत्काल विधिक कार्यवाही करने के निर्णय के आदेश निर्गत होने के 14 माह गुजर जाने के बाद भी आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव और अपर सचिव ने गबन और घोटाला करने वाले अधिकारियों और कार्मिकों के विरुद्ध अभी तक कोई भी विधिक कार्यवाही नहीं की है और न ही गबन और घोटाला करने वाले अधिकारियों और कार्मिकों से गबन की गयी धनराशी की रिकवरी की गयी है.
विभागीय बजट से धन के गबन होने के आरोपों की पुष्टि हो जाने, सम्पूर्ण साक्ष्य उपलब्ध होने और मुख्य सचिव के द्वारा 14 माह पूर्व तत्काल विधिक कार्यवाही करने व रिकवरी किये जाने के आदेश निर्गत होने के बावजूद भी गबन और घोटालों के आरोपियों पर कोई विधिक कार्यवाही न किये जाने, किसी भी गबन के आरोपी के विरुद्ध अब तक FIR दर्ज न कराये जाने तथा किसी भी गबन के आरोपी से अब तक गबन की गई धनराशी की रिकवरी न किये जाने से यह साफ है कि आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव और अपर सचिव आरोपियों को संरक्षण प्रदान कर रहे हैं और मुख्य सचिव के आदेश की अवहेलना कर रहे हैं.
*दिनांक 24 जनवरी 2024 को मुख्य सचिव एस०एस०संधू के सामने शासी निकाय की बैठक में प्रस्तुत किये गये 10.59 करोड़ रुपय के गबन और घोटालों के प्रकरण-*
1- शासी निकाय के कार्यवृत्त के बिंदु संख्या 03 में आपदा विभाग के सचिव द्वारा स्वीकार किया गया है कि 07 कर्मचारियों द्वारा वित्तीय अनियमितता करते हुये बिना अनुमति के रु. 38,26,855/ (अड़तीस लाख छब्बीस हजार आठ सौ पचपन) बिना अनुमति के ग्रेचुटी के नाम पर आहरित किये गये हैं.
2- शासी निकाय के कार्यवृत्त के बिंदु संख्या 04 में स्वीकार किया गया है कि बिना किसी अनुमति और युक्तियुक्त प्रमाण के 07 कर्मचारियों को रु. 7,92,040/ (सात लाख बयानवे हजार चालीस) वितरित किये गये हैं.
3- शासी निकाय के कार्यवृत्त के बिंदु संख्या 05 में स्वीकार किया गया है कि DMMC के द्वारा वर्ष 2011 से वर्ष 2020 की अवधि तक आउटसोर्स कार्मिक श्री महावीर प्रसाद चमोली के निजी बैंक अकाउंट में रु. 90,37,984/ (नब्बे लाख सैंतीस हजार नौ सौ चौरासी) बिना अनुमति के ट्रान्सफर किये गये और फर्जी बिलों से इस धनराशी का समायोजन किया गया है.
4- शासी निकाय के कार्यवृत्त के बिंदु संख्या 05 में यह भी स्वीकार किया गया है कि DMMC के द्वारा UNDP परियोजना के अंतर्गत प्राप्त रु. 6,23,90,513/ (छह करोड़ तेईस लाख नब्बे हजार पांच सौ तेरह) की धनराशी के व्यय से सम्बंधित कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, विश्वसनीय सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि इस धनराशी का भी फर्जी बिलों से समायोजन किया गया है.
5- शासी निकाय के कार्यवृत्त के बिंदु संख्या 05 में यह भी स्वीकार किया गया है कि DMMC के द्वारा Silent Hero पिक्चर बनाने के लिये फिल्म निर्माता श्री महेश भट्ट को बिना अनुमति के रु. 50 लाख दिये गये.
6- शासी निकाय के कार्यवृत्त के बिंदु संख्या 05 में यह भी स्वीकार किया गया है कि DMMC के अधिशासी निदेशक द्वारा लिये गये 02 लाख रुपय के एडवांस के सापेक्ष 90,000 रुपय का विवरण उपलब्ध नहीं हैं साथ ही रु. 3,86,193/ (तीन लाख छियासी हजार एक सौ तिरानवे) के एडवांस का भुगतान अभी बकाया है. इसके अलावा वित्तीय वर्ष 2014-15 में लिये गये रु. 1,30,000/ (एक लाख तीस हजार) रुपय के एडवांस का फर्जी समायोजन किया गया है.
7- शासी निकाय के कार्यवृत्त के बिंदु संख्या 05 में यह भी स्वीकार किया गया है कि DMMC के द्वारा वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा के दौरान अधिकारीयों विशषज्ञों और कार्मिकों के लिये होटल, भोजन इत्यादि व्यवस्थाओं के सापेक्ष भुगतान की गयी धनराशी रु. 82,92,000/ (बयासी लाख बयानवे हजार) के भुगतान से सम्बंधित कोई अभिलेख उपलब्ध नहीं है अर्थात यह फर्जी भुगतान किया गया है.
8- शासी निकाय के कार्यवृत्त के बिंदु संख्या 07 में यह स्वीकार किया गया है कि DMMC में कार्यरत 04 नियमित कार्मिकों को त्रुटिपूर्ण व अधिक वेतन दिया जा रहा है लेकिन शासी निकाय से यह बात छुपायी गयी कि इन 04 कार्मिकों को अधिक दिये गये वेतन अनुमानित 01 करोड़ 50 लाख रुपय की इनसे रिकवरी की जानी है और दो कार्मिक जो कि डेटा एन्ट्री ऑपरेटर के पद पर कार्यरत हैं उन्हें 2400 ग्रेड वेतन के बजाय 4200 ग्रेड वेतन पर दोगुना वेतन दिया जा रहा है। इन कार्मिकों के ग्रेड वेतन अभी संशोधित किये जाने बाकी हैं. हैरानी की बात है कि मुख्य सचिव का आदेश निर्गत होने के 14 माह बाद भी आहरण वितरण अधिकारी जो कि अपर सचिव हैं के द्वारा इन कार्मिकों को गलत वेतन निगत किया जा रहा है। वेतन में अधिक निर्गत की गई धनराशी की इनसे अभी तक रिकवरी नहीं की गयी है.
9- शासी निकाय के कार्यवृत्त के बिंदु संख्या 08 में यह स्वीकार किया गया है कि DMMC में कार्यरत 02 संविदा कार्मिकों से उन्हें निर्गत किये गये गलत वेतन की रिकवरी कर ली गयी है लेकिन शासी निकाय से यह बात छुपायी गयी कि एक अन्य संविदा कर्मचारी श्री के०एन०पांडे से उन्हें निर्गत अधिक वेतन अनुमानित 10 लाख रुपय की रिकवरी अभी तक नहीं की गयी है.
*इस प्रकार शासी निकाय के समक्ष आपदा प्रबंधन विभाग के द्वारा प्रस्तुत किये गये गबन और घोटालों के प्रकरणों की कुल धनराशी- रु 10,59,45,585 (दस करोड़ उन्सठ लाख पैंतालिस हजार पांच सौ पिचासी) होती है जिसकी सम्बंधित अधिकारियों और कार्मिकों से रिकवरी अभी की जानी बाकी है.*