राजकीय शिक्षक संघ उत्तराखंड का सांकेतिक आंदोलन तेज़, न्यायोचित मांगों को लेकर मौन जुलूस और कैंडल मार्च का ऐलान
देहरादून: राजकीय शिक्षक संघ उत्तराखंड पिछले दो वर्षों से लगातार अपनी न्यायोचित मांगों को लेकर सांकेतिक आंदोलनों के माध्यम से सरकार का ध्यान आकृष्ट करता आ रहा है। प्रमुख मांगों में शिक्षकों की आठ वर्षों से लंबित पदोन्नति और पारदर्शी स्थानांतरण नीति को लागू करने की माँग प्रमुख है।
संघ का आरोप है कि विभागीय उपेक्षा और शासन की उदासीनता के चलते शिक्षकों के पदोन्नति संबंधी प्रकरण लगातार लंबित पड़े हैं। इस मुद्दे को लेकर संघ द्वारा न्यायालय में भी जनहित याचिका दायर की गई थी, जिस पर सुनवाई करते हुए माननीय उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश महोदय ने भी इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की थी।
संघ का कहना है कि आंदोलन को बलपूर्वक दबाने, शिक्षकों को डराने और प्रताड़ित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, जो लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के विरुद्ध है। संघ ने इन प्रयासों की कड़ी निंदा की है।
आज 18 अगस्त को शिक्षक संघ ने पूरे उत्तराखंड में सत्याग्रह का आह्वान किया है। सभी जनपद मुख्यालयों पर सायंकाल मौन जुलूस निकाला जाएगा और देहरादून, हल्द्वानी एवं श्रीनगर में शाम 7 बजे से कैंडल मार्च आयोजित कर शांतिपूर्ण रूप से न्याय की माँग की जाएगी।
संघ ने मीडिया से अपील की है कि वह इस संघर्ष में अभिव्यक्ति के चौथे स्तंभ के रूप में भूमिका निभाते हुए, पूर्व की भांति शिक्षकों की आवाज़ को माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखंड तक पहुँचाने में सहयोग करे।
