Sunday, August 16, 2026
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वीडियो कांफ्रेसिंग: पीएम से सीएम ने आवासीय विद्यालयों को खोलने की मांगी अनुमति,होटल रेस्टोरेंट परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों को राहत देने की मांग

देहरादून । मुख्यमंत्री  त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सोमवार को प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित मुख्यमंत्रियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिग में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के समय पर लिए गए साहसिक निर्णय से देश आज खुद को सुरक्षित महसूस कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कोविड-19 के दृष्टिगत समय-समय पर प्रधानमंत्री के साथ ही अन्य केन्द्रीय मंत्रियों, केबिनेट सचिव एवं अन्य विभागीय सचिवों द्वारा दिये गये मार्ग दर्शन के लिये भी आभार व्यक्त किया।मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने प्रधानमंत्री को अवगत कराया कि लॉकडाऊन के दौरान राज्य का कोई भी गरीब व्यक्ति भूखा नहीं सोया है। राज्य सरकार के साथ ही सामाजिक स्तर पर इसकी व्यापक व्यवस्था की गई है। कोविड-19 की रोकथाम के लिये राज्य में लगभग 500 डॉक्टरों की तैनाती की गई तथा इतने ही पैरामेडिकल स्टॉफ की व्यवस्था गई। राज्य के 13 जिलों में से 11 जिलों में आई.सी.यू., वेंटिलेटर एवं बाईपैप की व्यवस्था तथा पैरामेडिकल स्टॉफ के प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है ताकि किसी भी असामान्य परिस्थिति का सामना किया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में कोरोना के मामले 45 दिनों में डबल हो रहे हैं तथा रिकवरी रेट 67.6 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि राज्य में 68 पोजिटिव मामले हैं जिनमें से 46 व्यक्ति स्वस्थ होकर घर लौट गये हैं।

प्रवासियों को घर पहुंचाने की सरकार कर रही है प्रयास

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक राज्य में 45 हजार प्रवासियों को वापस लाया गया है। जिसका व्यय राज्य सरकार द्वारा वहन किया गया है। पुणे व सूरत से भी ट्रेन द्वारा लोगों को वापस लाया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा लगभग 2 लाख श्रमिकों के खाते में 2,000 रू0 की धनराशि जमा करायी गयी है। लगभग 3500 उद्योगों में 45 प्रतिशत क्षमता के साथ कार्य आरम्भ किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में श्रमिक कानूनों में सुधार किया गया है। कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग की दिशा में पहल की गई है। मुख्यमंत्री ने उद्योगों की भांति किसानों को सिंगल विंडो सिस्टम की तरह पोर्टल तैयार किये जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि किसान मजबूत होगा तो आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि खनन के चुगान में बड़ी संख्या में श्रमिकों की आवश्यकता रहती है। इसके लिये भी एन.जी.टी से अनुमति प्रदान करने में प्राथमिकता दिये जाने की अपेक्षा मुख्यमंत्री ने की।

 

आवासीय विद्यालयों को खोलने की मिले अनुमति

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में आवासीय विद्यालयों को खोलने की अनुमति प्रदान करने के साथ ही वित्तीय सीमितता एवं टैक्स कलेक्शन में हो रही कमी के कारण ऋण सीमा को 3 प्रतिशत से 4 प्रतिशत किया जाए। कंटेनमेंट जोन के बाहर आर्थिक गतिविधियों को अनुमति दी जाए। राज्य के अन्दर ग्रीन जोन के बीच में सीमित पर्यटन गतिविधियां अनुमन्य की जाए। राज्य के द्वारा मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना पीएमईजीपी के स्वरूप पर प्रारम्भ कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस महामारी से होटल, रेस्टोरेंट तथा पर्यटन एवं परिवहन व्यवसाय सर्वाधिक प्रभावित हुआ है। राज्य में करीब ढ़ाई लाख एमएसएमई उद्योग है जिनसे कई लाखां लोगों को रोजगार मिलता है इन्हें राहत देने के लिए विचार किया जाना चाहिए।

 

मनरेगा की तर्ज पर शहर के मजदूरों के लिए भी योजना बनाई जाएं

मनरेगा के अंतर्गत मानक गतिविधियों में होमस्टे एवं अन्य गतिविधियां भी अनुमन्य की जाए। मनरेगा के अंतर्गत अल्पावधि कृषि गतिविधियों को भी अनुमन्य किया जाना चाहिए। व्यक्तिगत लाभ की श्रेणी में पुरुष जॉब कार्ड धारक को फार्म उत्पादन प्रसंस्करण यूनिट का निर्माण अनुमन्य किया जाए (वर्तमान में यह एनआरएलएम स्वयं सहायता समूह की महिलाओं हेतु ही अनुमन्य है।) मनरेगा के पैटर्न पर शहरी क्षेत्रों में मजदूरों हेतु एक नई योजना लाई जानी चाहिए। राज्य में काफी संख्या में प्रवासी आ रहे हैं जिनके पास कोई राशन कार्ड नहीं है। भारत सरकार द्वारा 01 अप्रैल के उपरांत राशन कार्ड बनाने पर मनाही की गई है। यह लोग अत्यंत गरीब है एवं राज्य में इनकी संख्या करीब 03 लाख के आसपास है। इनके जीवनयापन का भी कोई तत्काल साधन नही है। अतः इनके राशन कार्ड बनाने अत्यंत आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एस0डी0आर०एफ0 की धनराशि से कोविड-19 के प्रबन्धन तथा अवस्थापना सृजन से सम्बन्धित समस्त खर्चे को अनुमन्य किया जाना चाहिए।

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