टीईटी की बाध्यता को लेकर उठ रहें है सवाल,शिक्षा निदेशक से माजिला ने की कई मांगे
देहरादून। देशभर में लंबे से शिक्षक संगठन टीईटी की अनिवार्यता प्रमोशन में किए जाने का विरोध कर रहे हैं, सुप्रीम कोर्ट के दिए फैसले से शिक्षकों को निजात दिलाने की मांग राज्य सरकारों और केंद्र सरकार से भी मांग कर रहे हैं,लेकिन इस दिशा में अभी तक कोई निर्णय नहीं हो पाया है। उत्तराखंड में भी शिक्षक इस फैसले से निजात दिलाने की मांग कर रहें है,खासकर एलटी से प्रवक्ता पदों पर होने वाले प्रमोशन और हेडमास्टर पदों पर प्रमोशन को लेकर जो अड़चन आ रही है,इसी मांग को लेकर राजकीय शिक्षक संघ के पूर्व महामंत्री सोहन माजिला ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक विनोद कुमार सेमल्टी से मुलाकात कर मांग की है,कि सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था,वह प्राम्भिक शिक्षा को लेकर है,न कि एलटी से प्रवक्ता पदों पर प्रमोशन को लेकर है। इस लिए उन्होंने माध्यमिक निदेशक से मांग की है। जो इस प्रकार है –
1. मा0 सर्वोच्च न्यायालय तथा एन०सी०ई०टी० के आदेश मेंप्रवक्ता व प्रधानाध्यापक पद के लिए टी०ई०टी० की अनिवार्यता के संबंध में निर्देश सार्वजनिक किए जांय।
2. एल०टी० में कार्यरत अथवा एल०टी० से प्रवक्ता पद पर
पदोन्नत अध्यापक, जिनकी 05 वर्ष से कम की सेवा शेष हैं,उनको टी०ई०टी० की अनिवार्यता से मुक्त रखा गया है तो उनकी पदोन्नति के संबंध में विभाग स्तर से गतिमान कार्यवाही से शिक्षकों को अवगत कराया जाय।
3. दिनांक 11.04.2026 की बैठक के कार्यवृत्त में उल्लिखित है कि एल०टी० में कार्यरत अध्यापकों को 31.08.2028 तक टी०ई०टी० करना अनिवार्य हैं किन्तु दिनांक 31.08.2028 से पूर्व किसी भी प्रकार की पदोन्नति हेतु टी०ई०टी० की अनिवार्यता बताया जाना न्यायोचित नहीं है ।
4. प्रवक्ता और प्रधानाध्यापकों हेतु टी०ई०टी० की अनिवार्यता नहीं है,तो एल०टी० में कार्यरत अध्यापकों को, जिन्हें 01.08.2028 से पूर्व पदोन्नति में रोका जाना मा० सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की विभाग द्वारा गलत व्याख्या
कर अवमानना है । अतः अनुरोध है कि उक्त बिन्दुओं पर स्पष्ट विभागीय निर्देश जारी किए जाय ताकि टी०ई०टी० की अनिवार्यता के सम्बन्ध में भ्रान्ति खत्म हो सके तथा प्रवक्ता और प्रधानाध्यापक के पदों पर शीघ्र पदोन्नति की जा सके।
