Thursday, July 23, 2026
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देहरादून

पिथौरागढ़ के एक स्कूल में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बना प्रभारी प्रधानाचार्य, शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के मुनस्यारी विकासखंड में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा व्यवस्था की गंभीर स्थिति को उजागर कर दिया है। यहां राजकीय इंटर कॉलेज (जीआईसी) खतेड़ा में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को ही प्रभारी प्रधानाचार्य की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। यह निर्णय तब लिया गया जब विद्यालय में कार्यरत प्रभारी प्रधानाचार्य ने शिक्षक संघ के आंदोलन के समर्थन में अपना पद त्याग दिया।

आंदोलन की पृष्ठभूमि

राजकीय शिक्षक संघ की ओर से चलाए जा रहे आंदोलन के तहत शिक्षकों ने पठन-पाठन कार्य के अलावा सभी विभागीय कार्यों से दूरी बना ली है। इसके चलते जिले भर में कई स्कूलों की प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो गई है। आंदोलन के तहत शिक्षक प्रभारी प्रधानाचार्य का दायित्व भी नहीं संभाल रहे हैं।

जीआईसी खतेड़ा में अनोखी व्यवस्था

जीआईसी खतेड़ा में स्थायी प्रधानाचार्य की नियुक्ति नहीं है। अब तक हिंदी प्रवक्ता छोटे सिंह को प्रभारी प्रधानाचार्य का कार्यभार सौंपा गया था। लेकिन शिक्षक संघ के आह्वान पर उन्होंने बाकायदा पत्र लिखकर हस्ताक्षर व मुहर के साथ अपना पद त्याग दिया। विद्यालय में अन्य कोई प्रशासनिक कर्मचारी न होने के कारण, यहां तैनात एकमात्र चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी राजू गिरी को प्रभारी प्रधानाचार्य का कार्यभार सौंप दिया गया।

पहली बार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को सौंपा गया चार्ज

यह संभवतः पहली बार है जब किसी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को शिक्षा विभाग में प्रभारी प्रधानाचार्य की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अब स्कूल में सभी विभागीय फैसले और प्रशासनिक कार्य इसी कर्मचारी के माध्यम से हो रहे हैं। इस फैसले ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

नियमों की आड़ में उठाया गया कदम?

विद्यालय में दो स्थायी शिक्षक (एक हिंदी प्रवक्ता और एक अन्य) के अलावा पांच अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं। लेकिन अतिथि शिक्षकों को विभागीय दायित्व नहीं सौंपा जा सकता। ऐसे में “नियमों की विवशता” का हवाला देकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को जिम्मेदारी देना अधिकारियों की मजबूरी बन गई।

विभागीय प्रतिक्रिया

खंड शिक्षा अधिकारी दिगंबर आर्या ने इस निर्णय को अनुचित बताया है। उन्होंने कहा: “राजकीय शिक्षक अपने आंदोलन के तहत छात्र और विभागीय हितों के खिलाफ निर्णय ले रहे हैं। यदि जीआईसी खतेड़ा के प्रभारी प्रधानाचार्य का पद किसी को सौंपना ही था, तो मुझसे संपर्क किया जा सकता था। जल्द ही इस मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी।”

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