मंगलौर विधानसभा उपनचुनाव त्रिकोणीय होने के आसार,बीजेपी आज तक नहीं जीत पाई मंगलौर विधानसभा,4 बार बसपा एक बार कांग्रेस की हुई है जीत

देहरादून।  उत्तराखंड के हरिद्वार जिले की मंगलोर विधानसभा सीट पर 10 जुलाई को उपचुनाव के लिए मतदान होना है बसपा विधायक सरवत करीब अंसारी के निधन के चलते यह सीट रिक्त हुई है,जिस पर उपचुनाव को लेकर बिगुल बच चुका है,सभी राजनीतिक दल अपनी अपनी जीत का दावा कर रहे हैं,लेकिन इस बार फिर से मंगलोर में मुकाबला त्रिकोणीय होने के आसार नजर आ रहे हैं। बसपा ने शरबत करीम अंसारी के बेटे उबेर दुरहमान को मैदान में उतारने का फैसला कर लिया है,तो वहीं कांग्रेस की तरफ से पूर्व विधायक काजी निजामुद्दीन का मैदान में उतरना तय है, हालांकि भाजपा के भीतर उम्मीदवार उतारने को लेकर मंथन जारी है, बीजेपी के लिए यह उपचुनाव किसी बड़ी अग्नि परीक्षा से कम होने वाला नहीं है क्योंकि अभी तक उत्तराखंड में जिसकी भी सरकारी रही है वह राजनीतिक दल उपचुनाव में जीत हासिल करने में कामयाब रहा है,लेकिन बसपा के गढ़ मंगलौर में जिस तरीके से अभी तक हुए पांच विधानसभा चुनाव में चार बार बसपा और एक बार कांग्रेस को जीत मिली है,उसे बीजेपी के लिए यह सीट टेंशन बढाने वाली होने वाली है। लेकिन क्या कुछ रोचक इतिहास मंगलोर सीट पर अब तक हुए चुनाव का रहा है,आप आंकड़ो के जरिये समझ सकते हैं।

2002 में पहली बार हुए विधानसभा चुनाव में बसपा से चुनाव लड़े काजी निजामुद्दीन ने कांग्रेस उम्मीदवार सरवत करीम अंसारी को हरा दिया,21,115 वोट लाकर और काजी निजामुद्दीन विधायक बनकर विधानसभा पहुंच गए।

2007 में हुए विधानसभा चुनाव में भी काजी निजामुद्दीन ने बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और 25,559 वोट लाकर जीत हासिल कर ली,लेकिन इस बार रालोद की कुलदीप चौहान दूसरे नंबर पर रहे, जबकि शरबत करीम अंसारी तीसरे नंबर पर खिसक गए।

2012 के विधानसभा चुनाव में बसपा के टिकट पर सरवत करीम अंसारी चुनाव लड़े और 24,706 वोटो लाकर जीत हासिल कर विधानसभा पहुंच गए, और कांग्रेस से चुनाव लड़े काजी निजामुद्दीन चुनाव हार गए।

2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने फिर से काजी निजामुद्दीन पर भरोसा जाताया है,और काजी निजामुद्दीन ने 31,352 वोट लाकर जीत हासिल कर ली।

2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने फिर शरबत करीम अंसारी को टिकट दिया और 32,660 वोट लाकर जीत हासिल की,लेकिन कांग्रेस की तरफ से काजी निजामुद्दीन दूसरे नंबर पर रहे और 32,062 हासिल कर 598 मतों के अंतर से चुनाव हार गए।

अब मंगलोर विधानसभा सीट पर उपचुनाव होने जा रहा है लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव के जो नतीजे सामने आए हैं,उसे कांग्रेस का मनोबल सातवें आसमान पर है, तो बसपा के होश भी ठिकाने लगे हुए हैं,जबकि भाजपा की राह मुश्किल नजर आ रही है। मंगलोर विधानसभा सीट पर 2024 के चुनावी नतीजे में कांग्रेस को 44,101 मत हासिल हुई तो वहीं भाजपा को 21,100 मत प्राप्त हुए जबकि बसपा के खाते में 5,507 वोट ही आए।

 आंकड़ों के जरिया आप समझ सकते हैं कि मंगलोर उपचुनाव बीजेपी के लिए आसान होने वाला नहीं है अगर भाजपा को जीत तलाश नहीं है तो मुस्लिम और एससी-एसटी फैक्टर को भाजपा को साधना होगा। लेकिन भाजपा दावा कर रही है की अन्य उपचुनावों की तरह मंगलोर के साथ बद्रीनाथ सीट पर भी बीजेपी जीत दर्ज करेगी।

 

 मंगलौर विधानसभा सीट पर कांग्रेस को जीत की पूरी उम्मीद है,इसलिए कांग्रेस का मानना है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में करीबी अंतर से काजी निजामुद्दीन चुनाव हार गए,लेकिन पूरे देश में भी कांग्रेस का जनाधार बढ़ा है,और मंगलौर में लोकसभा चुनाव की जो नतीजे सामने आए हैं,उसे मंगलौर की जनता ने स्पष्ट संदेश दिया है की मंगलौर की जनता कांग्रेस के साथ है, 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा तीसरे नंबर पर मंगलौर में रही थी इसलिए बीजेपी जीत की उम्मीद ना करें।

 

 मंगलोर विधानसभा सीट पर उपचुनाव त्रिकोणीय होने के आसार नजर आ रहे हैं, बीजेपी के लिए जीत की राह आसान तभी होगी जब कांग्रेस को जो वोट बैंक लोकसभा चुनाव में मिला है, वह बसपा की तरफ शिफ्ट हो और बसपा और कांग्रेस एक दूसरे को बराबर का नुकसान पहुंचाए तो बीजेपी की राह जीत की आसान हो सकती है, लेकिन देखना यही होगा कि आखिरकार मंगलौर की जंग में कौन फतह हासिल करता है।

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