Friday, July 24, 2026
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उत्तरायणी कौथिक महोत्सव 2026 का होगा भव्य आयोजन, लोकसंस्कृति, लोकस्वर और लोकआस्था का होगा विराट संगम

देहरादून। सेवा संकल्प फाउंडेशन द्वारा आयोजित उत्तरायणी कौथिक महोत्सव 2026 को लेकर फाउंडर ट्रस्टी गीता धामी ने प्रेस को जानकारी देते हुए बताया कि यह महोत्सव उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, परंपरा और सामाजिक चेतना का भव्य उत्सव होगा। यह आयोजन 5 से 8 फरवरी 2026 तक देहरादून में आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत पूरे वैभव के साथ मंच पर सजीव होगी। गीता धामी ने बताया कि महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।

उन्होंने जानकारी दी कि इस महोत्सव में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति को समर्पित देश–प्रदेश के प्रतिष्ठित कलाकार अपनी प्रस्तुतियाँ देंगे। मंच पर कमला देवी, किशन महिपाल, पवनदीप राजन, अजब सिंह तोमर, गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी, खुशी जोशी, गोविंद अधिकारी, ललित गित्यार, ललित मोहन जोशी, बीके सामंत, सौरभ मैठानी, श्वेता मेहरा, रेशमा शाह, जुबिन नौटियाल और इंदर आर्या जैसे प्रसिद्ध कलाकार भी महोत्सव की शोभा बढ़ाएंगे।

गीता धामी ने बताया कि महोत्सव में प्रदेश के विभिन्न जनजातीय क्षेत्रों से जुड़े सांस्कृतिक दल भी सहभागिता करेंगे, जो पारंपरिक वेशभूषा, लोकनृत्य और लोकगीतों के माध्यम से उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को मंच पर प्रस्तुत करेंगे।

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि महोत्सव के समापन दिवस पर प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। उनके करकमलों से समापन समारोह संपन्न होगा।

यह महोत्सव केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका उद्देश्य उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति, पारंपरिक खानपान और प्रतिभाओं को एक साझा मंच प्रदान करना भी है। इसी क्रम में महोत्सव के दौरान उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजनों पर आधारित विशेष फूड स्टॉल, विद्यालयों की सहभागिता से सांस्कृतिक व रचनात्मक प्रतियोगिताएं, तथा विभिन्न सामाजिक व सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा, जिससे बच्चों, युवाओं और आम नागरिकों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिल सके। इन गतिविधियों के माध्यम से जहां एक ओर लोकसंस्कृति को बढ़ावा दिया जाएगा, वहीं दूसरी ओर नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं, खानपान और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का भी सार्थक प्रयास किया जाएगा।

गीता धामी ने कहा कि उत्तरायणी कौथिक महोत्सव केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि संस्कृति, समाज और सेवा के समन्वय का पर्व है। इसका उद्देश्य उत्तराखंड की लोकपरंपराओं को सहेजना, नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना और सामाजिक चेतना को सशक्त बनाना है।

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