जब दुपट्टे का टुकड़ा बन गया रक्षासूत्र,अहमदाबाद की बहन ने सीएम धामी को भेजी राखी और भावुक पत्र
देहरादून। रिश्ते सिर्फ़ खून के मोहताज नहीं होते… कुछ रिश्ते आपदा के सन्नाटे, अपनों के खोने के डर और मुश्किल घड़ी में हाथ थामने वाले अहसास से बनते हैं।बात पिछले साल की है, जब कुदरत के कहर ने उत्तराखंड के धराली को हिलाकर रख दिया था। चारों तरफ़ तबाही का मंज़र था, सहमे हुए चेहरे थे और अपनों तक पहुँचने की आस थी। उसी तूफ़ान के बीच अहमदाबाद की धनगौरी बरोलिया भी फँसी हुई थीं।
तभी आपदा के उस मुश्किल दौर में, प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ज़मीनी हालात का जायजा लेने धराली पहुँचे। उन्होंने रोते-बिलखते लोगों का हौसला बढ़ाया, उन्हें सहारा दिया।
इत्तेफाक से वो दिन रक्षाबंधन के आसपास का था। जब सीएम धामी धनगौरी से मिले, तो बातचीत के बीच उन्होंने सहजता से कहा— “अगर आपके पास राखी हो, तो आप मुझे बांध सकती हैं…”
लेकिन तबाही के उस मंज़र में राखी कहाँ मिलती? धनगौरी की आँखें भर आईं। उन्होंने बिना पल गँवाए अपने दुपट्टे का एक छोटा सा टुकड़ा फाड़ा… और वही कपड़ा रक्षासूत्र बनाकर मुख्यमंत्री की कलाई पर बाँध दिया।
धनगौरी लिखती हैं— “वह पल मेरी ज़िंदगी का सबसे खास पल बन गया। जैसे द्रौपदी की पुकार पर श्रीकृष्ण आए थे, वैसे ही उस मुश्किल घड़ी में आप हमारे लिए सहारा बनकर खड़े थे। उसी दिन मैंने आपको अपना धर्म-भाई मान लिया था।”
आज एक साल बीत चुका है। धनगौरी अहमदाबाद में हैं, लेकिन वो दुपट्टे के टुकड़े से शुरू हुआ रिश्ता आज भी उनके दिल में उतना ही ताज़ा है। इस रक्षाबंधन पर उन्होंने अपने भाई सीएम धामी के लिए राखी के साथ एक भावुक पत्र भेजा है, जिसमें उनके स्वस्थ और दीर्घायु होने की कामना की है।
सच है… धागे टूट सकते हैं, लेकिन मुश्किल वक़्त में दुपट्टे के टुकड़े से बंधी यह राखी साबित करती है कि इंसानियत और अपनो के अहसास का रिश्ता हर बंधन से ऊपर होता है।

