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सैनिकों के बीच पहुंचे सीएम धामी,अपने हाथों से मिठाई खिलाकर मनाई दीपावली

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को गढ़ीकैंट स्थित गढ़वाल ग्रीन्स प्रशिक्षण मैदान में वीर जवानों के साथ दीपावली मनाई। इस दौरान मुख्यमंत्री ने जवानों को अपने हाथों से मिठाई खिलाकर त्योहार की खुशियां साझा कीं और उन्हें दीपावली की शुभकामनाएं दीं। जवानों के बीच पहुंचे मुख्यमंत्री ने उनके साथ आत्मीय संवाद किया और देश की सुरक्षा में उनके साहस, शौर्य एवं समर्पण के लिए आभार जताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गढ़वाल रेजीमेंट के वीर जवानों के बीच आकर उन्हें अपने परिवार के साथ दीपावली मनाने जैसा अनुभव हो रहा है। त्योहारों की असली खुशी अपनों के बीच होती है और देश के सैनिक उनके परिवार का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि जब देशवासी अपने घरों में दीपावली मना रहे होते हैं, तब सैनिक सीमाओं पर मुस्तैद रहकर देश की सुरक्षा का दायित्व निभाते हैं। हमारे घरों में जलने वाले दीपों के पीछे सैनिकों का त्याग और उनके परिवारों का समर्पण छिपा है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अपने सैनिक परिवार से जुड़ी स्मृतियां भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि उनका जन्म सैनिक परिवार में हुआ है। उनके पिता ने सेना में रहते हुए उन्हें देशसेवा, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के संस्कार दिए। पिता अक्सर गढ़वाल रेजीमेंट के वीर सैनिकों की शौर्यगाथाएं सुनाया करते थे। विशेष रूप से वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध में नूरानांग मोर्चे पर अदम्य साहस दिखाने वाले महावीर चक्र विजेता अमर शहीद जसवंत सिंह रावत की वीरता का उल्लेख करते थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उसी गौरवशाली रेजीमेंट के जवानों के बीच उपस्थित होकर उन्हें अपने पिता की बातें याद आ रही हैं।

मुख्यमंत्री ने अमर शहीद जसवंत सिंह रावत सहित देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सभी वीर सैनिकों को नमन किया। उन्होंने कहा कि गढ़वाल रेजीमेंट का इतिहास साहस, अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और बलिदान की गौरवगाथाओं से भरा है। उत्तराखंड की वीरभूमि ने हमेशा ऐसे सपूत दिए हैं, जिन्होंने राष्ट्र को सर्वोपरि रखा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की सैन्य शक्ति और सामरिक क्षमता लगातार मजबूत हो रही है। सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से भारत ने अपनी सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का संदेश दिया है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, सेनाओं के आधुनिकीकरण और स्वदेशी रक्षा उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है। सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क, पुल और सुरंगों के निर्माण से सैन्य आवागमन और संचार व्यवस्था भी सुदृढ़ हुई है।

उन्होंने कहा कि सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों का सम्मान एवं कल्याण राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। शहीद सैनिकों के आश्रितों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये की गई है। शहीदों के परिवार के एक सदस्य को सरकारी सेवा में नौकरी देने की व्यवस्था के तहत कई आश्रितों को सेवायोजित किया गया है। इसके लिए आवेदन की समयसीमा भी दो वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष की गई है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि देहरादून में निर्माणाधीन सैन्यधाम का कार्य भी लगभग पूरा हो चुका है। यह सैन्यधाम देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों के शौर्य और त्याग का प्रतीक बनेगा। उन्होंने कहा कि सैनिक केवल सीमाओं के प्रहरी नहीं, बल्कि देशवासियों की खुशियों और सुरक्षित जीवन के रक्षक भी हैं। राज्य सरकार सैनिक परिवारों की समस्याओं के समाधान और उनके कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।

कार्यक्रम में गढ़वाल मंडल आयुक्त आनंद स्वरूप, पुलिस महानिरीक्षक गढ़वाल परिक्षेत्र राजीव स्वरूप, उत्तराखंड सब एरिया के डिप्टी जीओसी ब्रिगेडियर आरएस थापा, कर्नल प्रतुल थपलियाल, लेफ्टिनेंट कर्नल रवि मोहन बिष्ट, लेफ्टिनेंट कर्नल मोहित जोशी, लेफ्टिनेंट कर्नल एसएस सिद्दीकी, मेजर केडी सिंह और सूबेदार मेजर रघुवीर सिंह भंडारी सहित सैन्य अधिकारी एवं जवान मौजूद रहे।

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